इसराइल का आयरन डोम

पिछले साल ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच इसराइल का एंटी मिसाइल डिफ़ेंस सिस्टम ‘आयरन डोम’ सुर्खियों में रहा था.

हमास के साथ युद्ध के दौरान इसराइल ख़ुद को सुरक्षित रखने के लिए आयरम डोम सिस्टम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करता रहा है. उसने ईरान के हमलों के दौरान भी इसका इस्तेमाल किया.

ईरान के दाग़े ज़्यादातर रॉकेट इसराइल की सुरक्षा शील्ड के कारण ज़मीन तक पहुंचने से पहले ही नष्ट कर दिए गए. इसी सुरक्षा शील्ड का नाम आयरन डोम एंटी मिसाइल डिफेन्स सिस्टम है.

इसराइली अधिकारियों के मुताबिक़- ये तकनीक 90 प्रतिशत मामलों में कारगर साबित होती है. ये रॉकेट को रिहायशी इलाकों में ज़मीन पर गिरने से पहले ही मार गिराती है.

आयरन डोम एक बड़े मिसाइल डिफेंस सिस्टम का हिस्सा है, जिसे इसराइल ने लाखों डॉलर खर्च कर बनाया है.

ये सिस्टम ख़ुद से पता लगा लेता है कि मिसाइल रिहायशी इलाकों में गिरने वाली है या नहीं और कौन-सी मिसाइल अपने निशाने से चूक रही है.

सिर्फ वो मिसाइल जो रिहायशी इलाकों में गिरने वाली होती हैं, उन्हें ये सिस्टम बीच हवा में मार गिराता है. ये खूबी इस तकनीक को बेहद किफ़ायती बनाती है.

रक्षा विशेषज्ञ संजीव श्रीवास्तव के मुताबिक़ इसराइल के पास डेविड फ्लिंग नाम का एक एयर डिफ़ेंस सिस्टम भी है, जिसकी रेंज 70 से 300 किलोमीटर तक है.

आयरन डोम
इमेज कैप्शन,आयरन डोम का विकास इसराइली कंपनी राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स और इसराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ ने अमेरिकी मदद से किया है

साल 2006 में इस्लामी समूह हिज़बुल्लाह से लड़ाई के बाद इसराइल ने इस तकनीक पर काम करना शुरू किया था.

कई सालों की रिसर्च के बाद साल 2011 में इस सिस्टम को टेस्ट किया गया. टेस्ट के दौरान दक्षिणी शहर बीरसेबा से दागे गए मिसाइलों को ये सिस्टम मार गिराने में कामयाब रहा था.

आयरन डोम की डिजाइन इस मक़सद से तैयार की गई है कि छोटी दूरी से किए गए हमलों से बचाव किया जा सके. ये किसी भी मौसम में काम करता है.

इसमें रडार लगा होता है जो उसके इलाके की तरफ़ बढ़ रहे रॉकेट या मिसाइल को रास्ते में ही ट्रैक कर सकता है.

आयरन डोम डिफेंस सिस्टम के यूनिट्स पूरे इसराइल में तैनात हैं. हरेक यूनिट्स में तीन से चार लॉन्च व्हीकल होते हैं जो 20 इंटरसेप्टर मिसाइलें दाग सकते हैं.

आयरन डोम डिफेंस सिस्टम किसी एक जगह पर स्थाई रूप से स्थापित करके भी ऑपरेट किया जा सकता है और इसे आसानी से कहीं ले जाया भी सकता है.

हालांकि कुछ जानकार मानते हैं कि यह सिस्टम पूरी तरह से मिसाइल प्रूफ नहीं है. उनका मानना है कि ये तकनीक फिलहाल ग़जा की तरफ से आने वाले रॉकेट को नष्ट कर देती है लेकिन भविष्य में मुमकिन है कि किसी दूसरे दुश्मन के ख़िलाफ़ ये उतनी कारगर

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