अमेरिका अपने गोल्डन डोम सिस्टम पर 175 अरब डॉलर का ख़र्च कर रहा है. गोल्डन डोम सिस्टम के लिए अमेरिकी बजट में 25 अरब डॉलर की शुरुआती रकम निर्धारित की गई है.
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका के पास जो मौजूदा डिफेंस सिस्टम है वो इसके संंभावित दुश्मनों के तेजी से बढ़ते आधुनिक हथियारों से बचाव के मामले में पिछड़ गया है.
ट्रंप ने बताया है कि नया मिसाइल डिफेंस सिस्टम ज़मीन, समुद्र और अंतरिक्ष में नई पीढ़ी की टेक्नोलॉजी से लैस होगा. इस सिस्टम के तहत अंतरिक्ष में ऐसे सेंसर और इंटसेप्टर होंगे जो इन हवाई हमलों के ख़तरों को रोक सकेंगे.
ये सिस्टम कुछ हद तक इसराइल के आयरन डोम से प्रेरित है. इसराइल साल 2011 से रॉकेट और मिसाइल हमलों को रोकने में इसका इस्तेमाल कर रहा है.
हालांकि गोल्डन डोम इससे काफ़ी बड़ा होगा और ये हाइपरसोनिक हथियारों समेत ज़्यादा व्यापक ख़तरों का सामना करने में सक्षम होगा.
ये ध्वनि की गति और फ्रैक्शनल ऑर्बिटल बॉम्बार्डमेंट सिस्टम्स यानी फोब्स से भी ज़्यादा तेज गति से जगह बदल सकेगा. फोब्स अंतरिक्ष से हथियार दाग सकता है.
ट्रंप ने बताया इस तरह के तमाम ख़तरों को हवा में ही ख़त्म किया जा सकेगा. इसकी सफलता दर लगभग सौ फ़ीसदी है.
फ़िलहाल अमेरिका के पास मौजूद थाड यानी टर्मिनल हाइ एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस मिसाइल सिस्टम को उसने कई सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए तैनात किया है. इनमें दक्षिण कोरिया, गुवाम और हैती भी शामिल हैं.
यह प्रणाली मध्यम रेंज की बैलेस्टिक मिसाइलों को उड़ान के शुरुआती दौर में ही गिराने में सक्षम है. इसकी टेक्नोलॉजी हिट टू किल है यानी यह सामने से आ रहे हथियार को रोकती नहीं बल्कि नष्ट कर देती है.
यह 200 किलोमीटर दूर तक और 150 किलोमीटर की ऊंचाई तक मार करने में सक्षम है.
दुनियाभर के प्रमुख देशों के पास मौजूद एयर डिफ़ेंस सिस्टम पर बीबीसी संवाददाता चंदन कुमार जजवाड़े ने रक्षा विशेषज्ञ संजीव श्रीवास्तव से बात की.
संजीव श्रीवास्तव कहते हैं, “अमेरिका के पास थाड के अलावा एमआईएम 104 पैट्रिअट एयर डिफ़ेंस सिस्टम भी है, जिसकी ऑपरेशनल रेंज 170 किलोमीटर है.”
उनका कहना है, “सभी देशों की कोशिश होती है कि वो हवाई हमलों के प्रति मल्टी लेयर सिक्योरिटी रखें. अमेरिका, जर्मनी और इटली के पास एमईए डिफ़ेंस सिस्टम भी है.”